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ऊधो! भूलि भले भटके

पद · लगभग २ मिनट
ऊधो! भूलि भले भटके।कहत कही कछु बात लड़ैते तुम ताही अटके॥देख्यो सकल सयान तिहारो, लीन्हे छरि फटके।तुमहिं दियो बहराय इतै कों, वै कुबजा सों अटके॥लीजो जोग सँभारि आपनो जाहु तहाँ टटके।सूर, स्याम तजि कोउ न लैहे या जोगहि कटुके॥३५६॥

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