रसांतर — एक रस की उपस्थिति में दूसरे रस का उभरना। पढ़ते हुए हम भी एक अनुभूति से दूसरी तक जाते हैं।
हिंदी साहित्य का खुला संसार
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रसांतर — एक रस की उपस्थिति में दूसरे रस का उभरना। पढ़ते हुए हम भी एक अनुभूति से दूसरी तक जाते हैं।