मैं बड़ मैं बड़ मैं बड़ माँटी, मण दसना जट का दस गाँठी॥ टेक॥मैं बाबा का जाध कहाँऊँ, अपणी मारी नींद चलाऊँ।इनि अहंकार घणें घर घाले, नाचर कूदत जमपुरि चाले॥कहै कबीर करता ही बाजी, एक पलक मैं राज बिराजी॥260॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+
सासु की दुखी ससुर की प्यारी जेठ के नाम डरौं रेकबीरकवितासासु की दुखी ससुर की प्यारी जेठ के नाम डरौं रेकबीर२ मिनट का पाठ