अब मैं पायौ राजा राम सनेही॥ टेक॥जा बिनु दुख पावै मेरी देही॥ टेक॥वेद पुरान कहत जाकी साखी, तीरथि ब्रति न छूटै जंम की पासी॥जाथैं जनम लहत नर आगैं, पाप पुंनि दोऊ भ्रम लागै॥कहै कबीर सोई तत जागा, मन भया मगन प्रेम रस लागा॥283॥

अब मैं पायौ राजा राम सनेही
कबीरपद · लगभग २ मिनट