मेरी सूचीपढ़ना शुरू करें

एक अचंभा ऐसा भया, करणीं थैं कारण मिटि गया

पद · लगभग २ मिनट
एक अचंभा ऐसा भया,करणीं थैं कारण मिटि गया॥ टेक॥करणी किया करम का नास, पावक माँहि पुहुप प्रकास।पुहुप मांहि पावक प्रजरै, पाप पुंन दोउ भ्रम टरै॥प्रगटी बास बासना धोइ, कुल प्रगट्यौ कुल घाल्यौ खोइ।उपजी च्यंत च्यंत मिटि गई, भौ भ्रम भागा ऐसे भई।उलटी गंग मेर कूँ चली, धरती उलटि अकासहिं मिली॥दास कबीर तत ऐसी कहै, ससिहर उलटि राह की गहै॥329॥

अब कुछ और पढ़ें