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कोकिल! हरि को बोल सुनाव

पद · लगभग २ मिनट

राग मलार

कोकिल! हरि को बोल सुनाव।मधुबन तें उपटारि स्याम कहँ या ब्रज लै कै आव॥जाचक सरनहि देत सयाने तन, मन, धन, सब साज।सुजस बिकात बचन के बदले, क्यों न बिसाहत आज॥कीजै कछु उपकार परायो यहै सयानो काज।सूरदास प्रभु कहु या अवसर बन बन वसँत बिराज॥३१९॥

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