राग मलार कोकिल! हरि को बोल सुनाव।मधुबन तें उपटारि स्याम कहँ या ब्रज लै कै आव॥जाचक सरनहि देत सयाने तन, मन, धन, सब साज।सुजस बिकात बचन के बदले, क्यों न बिसाहत आज॥कीजै कछु उपकार परायो यहै सयानो काज।सूरदास प्रभु कहु या अवसर बन बन वसँत बिराज॥३१९॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+