हरि किरपा जो होइतो, नाहिं होइतो नाहिं।पै गुरु किरपा दया बिनु, सकल बुद्धि बहि जाहिं॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+
प्रेम दिवाने जो भये, मन भयो चकना चूरसहजोबाईकविताप्रेम दिवाने जो भये, मन भयो चकना चूरसहजोबाई२ मिनट का पाठ