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सज्जन तजत न सजनता कीन्हेहु दोष अपार

दोहा · लगभग २ मिनट
सज्जन तजत न सजनता कीन्हेहु दोष अपार।ज्यौं चंदन छेदे तऊ सुरभित करहि कुठार॥

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