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हाशिया
कविता
जीती बाजी गुर प्रताप तें, माया मोह निवार
मलूकदास
दोहा · लगभग २ मिनट
जीती बाजी गुर प्रताप तें, माया मोह निवार।
कहें मलूक गुरु कृपा ते, उतरा भवजल पार॥
॥
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प्रेम नेम जिन ना कियो, जीतो नाहीं मैन
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ताको आवत देखि कै, कही बात समुझाय
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कविता
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मलूकदास
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