सुरंग दुरंग सोहत पाग लाल कैं, कुरंग कैसे लोचन अति लोने।कपोल विलोकत झलकें कल काननु कुंडल कुसुमित कोंने।रंग रंगीले अंग सबै नव, रंग-रंगे ऐसे पाछैं भए न आगैं होंने।नंददास सखि मेरी कहाँ बच, काम के आए टटावक टोंने॥

सुरंग दुरंग सोहत पाग लाल कैं
नंददासपद · लगभग २ मिनट