दीन बंधु दीना नाथ मेरो तन हेरिये।भाई नाहिं बन्धु नाहिं कुटुम परिवार नाहिं,ऐसा कोई मित्र नाहिं जाके ढिग जाइये॥सोने की सलैया नाहि रूपे का रुपैया नाहिं,कौड़ी पैसा गाँठ नहीं जासे कछु लीजिये॥खेती नाहिं बारी नाहिं बनिज व्यौपार नाहिं,ऐसा कोई साहुँ नाहिं जासों कछु माँगिये॥कहत मलूकदास छोड़ दे पराई आस,राम धनी पाय के अब का की सरन जाइये॥

दीन बंधु दीना नाथ मेरो तन हेरिये
मलूकदासपद · लगभग २ मिनट