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गगन चढ़ै फिर क्यों तिरै, रहिमन बहरी बाज

दोहा · लगभग २ मिनट
गगन चढ़ै फिर क्यों तिरै, रहिमन बहरी बाज।फेरि आइ बंधन परै, पेट अधम के काज॥४३॥

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