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ऐसिय कुंज बनी छबिपुंज

सवैया · लगभग २ मिनट
ऐसिय कुंज बनी छबिपुंज, रहै अलि गुंजत यों सुख लीजै।नैन बिसाल हिए बनमाल, बिलोकत रूप सुधा भरि पीजै॥जामिनि जाम की कौन कहै, जुग जात न जानिए ज्यों छिन छीजै।आनंद यों उमग्योई रहै, पिय मोहन को मुख देखिबो कीजै॥

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