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हाशिया
कविता
मनसिज माली की उपज, कही रहीम न जाइ
रहीम
दोहा · लगभग २ मिनट
मनसिज माली की उपज, कही रहीम न जाइ।
फूल स्याम के उर लगे, फल स्यामा उर आइ॥१३३॥
॥
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मन-सों कहाँ रहीम प्रभु, दृग-सों कहाँ देवान
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मन्दन के मारेहु गए, औगुन गनि न सिराहिं
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रहीम
कविता
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रहीम
कविता
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रहीम
कविता
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रहीम
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