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सर सूखे पंछी उड़ैं, औरै सरनि समाहिं

दोहा · लगभग २ मिनट
सर सूखे पंछी उड़ैं, औरै सरनि समाहिं।दीन मीन बिन पंख के, कहु रहीम कहँ जाहिं॥२४२॥

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