पाँणीं हीं तैं पातला, धूंवाँ हीं तैं भींण।पवनाँ वेगि उतावला, सोदोसत कविरै कीन्ह॥१२॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+
हम घर सूत तनहि नित ताना कंठ जनेऊ तुमारेकबीरकविताहम घर सूत तनहि नित ताना कंठ जनेऊ तुमारेकबीर२ मिनट का पाठ