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पासा पकड़या प्रेम का, सारी किया सरीर

साखी · लगभग २ मिनट
पासा पकड़या प्रेम का, सारी किया सरीर ।सतगुर दाव घताइया, खेलै दास कबीर ॥३२॥

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