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हाशिया
कविता
रहिमन घरिया रहँट की, त्यों ओछे की डीठि
रहीम
दोहा · लगभग २ मिनट
रहिमन घरिया रहँट की, त्यों ओछे की डीठि।
रीती सनमुख होति है, भरी दिखावै पीठि॥२००॥
॥
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रहिमन गठरी धूरि की, रही पवन ते पूरि
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रहिमन चाक कुम्हार को, माँगे दिया न देह
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