राग रामकली ऐसेई जन दूत कहावत।मोको एक अचंभो आवत यामेँ ये कह पावत?बचन कठोर कहत, कहि दाहत, अपनी महत गँवावत।ऐसी परकृति परति छाँह की जुवतिन ज्ञान बुझावत॥आपुन निलज रहत नखसिख लौं एते पर पुनि गावत।सूर करत परसँसा अपनी, हारेहु जीति कहावत॥६८॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+