भोर तैं साँझ लौं कानन ओर निहारति बाबरी नैकु न हारति।साँझ तैं भोर लौं तारिन ताकिबौ तारनि सों इकतार न टारति॥जौ कहूँ भावतो दीठि परै घनआनंद आँसुनि औसर गारति।मोहन सोंहन जोहन की लगियै रहै आँखिन कें उर आरति॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+
लगी है लगनि प्यारे पगी है सुरति तोसोंघनानंदकवितालगी है लगनि प्यारे पगी है सुरति तोसोंघनानंद२ मिनट का पाठ