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भोर तैं साँझ लौं कानन ओर

सवैया · लगभग २ मिनट
भोर तैं साँझ लौं कानन ओर निहारति बाबरी नैकु न हारति।साँझ तैं भोर लौं तारिन ताकिबौ तारनि सों इकतार न टारति॥जौ कहूँ भावतो दीठि परै घनआनंद आँसुनि औसर गारति।मोहन सोंहन जोहन की लगियै रहै आँखिन कें उर आरति॥

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