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मधुकर! जानत है सब कोऊ

पद · लगभग २ मिनट
मधुकर! जानत है सब कोऊ।जैसे तुम औ मीत तुम्हारे, गुननि निपुन हौ दौऊ॥पाके चोर, हृदय के कपटी, तुम कारे औ वोऊ।सरबसु हरत, करत अपनो सुख, कैसेहू किन होऊ॥परम कृपन थोरे धन जीवन उबरत नाहिंन सोऊ।सूर सनेह करै जो तुमसों सो करै आप-बिगोऊ॥२४५॥

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