राखी बांधति है नंदरानी।रत्नजटित की सुभग बनी अति माहन के मनमानी॥बिप्र बुलाइ दई बहु दच्छिना जसुधा हिय हरषानी।‘कुंभनदास’ गिरिधर के ऊपर रस बस बारति पानी॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+