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हाशिया
कविता
ए सजनी लोनो लला, लह्यो नंद के गेह
रसखान
दोहा · लगभग २ मिनट
ए सजनी लोनो लला, लह्यो नंद के गेह।
चितयो मृदु मुसिकाइ के, हरी सबै सुधि गेह॥
॥
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