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काम क्रोध मद लोभ नहिं, खट बिकार करि हीन

दोहा · लगभग २ मिनट
काम क्रोध मद लोभ नहिं, खट बिकार करि हीन।पंथ कुपंथ न जानहीं, ब्रह्म भाव रस लीन॥

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