राग मलार बारक जाइयो मिलि माधौ।को जानै कब छूटि जायगो स्वाँस, रहै जिय साधौ॥पहुनेहु नंद बबा के आबहु देखि लेहुँ पल आधौ।मिल ही में बिपरीत करी बिधि, होत दरस को बाधौ॥सो सुख सिव सनकादि न पावत जो सुख गोपिन लाधो।सूरदास राधा बिलपति है हरि को रूप अगाधो॥३१५॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+