मैं बन भूला तूँ समझाइ।चित चंचल रहै न अटक्यौ, बिषै बन कूँ जाइ॥ टेक॥संसार सागर मांहि भूल्यो, थक्यो करत उपाइ।मोहनी माया बाघनी थैं, राखि लै राम राइ।गोपाल सुनि एक बीनती, सुमति तन ठहराइ।कहै कबीर यहु काम रिप है, मारै सबकूँ ढाइ॥309॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+
स्वर्ग वास न बाछियै डारियै न नरक निवासुकबीरकवितास्वर्ग वास न बाछियै डारियै न नरक निवासुकबीर२ मिनट का पाठ
सुन्न संध्या तेरी देव देवा करि अधपति आदि समाईकबीरकवितासुन्न संध्या तेरी देव देवा करि अधपति आदि समाईकबीर२ मिनट का पाठ