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मैं बन भूला तूँ समझाइ

पद · लगभग २ मिनट
मैं बन भूला तूँ समझाइ।चित चंचल रहै न अटक्यौ, बिषै बन कूँ जाइ॥ टेक॥संसार सागर मांहि भूल्यो, थक्यो करत उपाइ।मोहनी माया बाघनी थैं, राखि लै राम राइ।गोपाल सुनि एक बीनती, सुमति तन ठहराइ।कहै कबीर यहु काम रिप है, मारै सबकूँ ढाइ॥309॥

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