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हाशिया
कविता
नाँन्हाँ काती चित दे महँगे मोलि बिकाइ
कबीर
साखी · लगभग २ मिनट
नाँन्हाँ काती चित दे महँगे मोलि बिकाइ।
गाहक राजा राम है और न नेड़ा आइ॥५८॥
॥
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नलनी सायर घर किया, दौं लागी बहुतेणि
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नां गुर मिल्या न सिष भया, लालच खेला डाव
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सुख माँगत दुख आगै आवै
कबीर
कविता
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कबीर
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कबीर
कविता
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कबीर
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कबीर
कविता
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कबीर
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