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माई हों गिरिधर गुण गाउं

पद · लगभग २ मिनट
माई हों गिरिधर गुण गाउं।मेरो तो यह व्रत है निरंतर और न रुचि उपजाऊं॥खेलन आंगन आओ लाड़ले नेकहु दरसन पाउं।कुंभनदास हिलग के कारन लालचि मन ललचाउं॥

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