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डागल ऊपरि दौड़णाँ, सुख निदणीं न सोइ

साखी · लगभग २ मिनट
डागल ऊपरि दौड़णाँ, सुख निदणीं न सोइ।पूनै पाये द्यौंहड़े ओछी ठौर न कोइ॥५६॥

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