मेरो मनमोहना, आयो नहीं सखी री॥कैं कहुं काज किया संतन का, कै कहुं गैल भुलावना॥कहा करूं कित जाऊं मेरी सजनी, लाग्यो है बिरह सतावना॥मीरा दासी दरसण प्यासी, हरिचरणां चित लावना॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+
प्रभु जी तुम दर्शन बिन मोय घड़ी चैन नहीं आवड़ेमीराबाईकविताप्रभु जी तुम दर्शन बिन मोय घड़ी चैन नहीं आवड़ेमीराबाई२ मिनट का पाठ