सो धन पिव जी साजि सँवारी।इब बेगि मिलौ तन जाइ बनवारी॥साजि सिंगार किया मन माहीं।अजहूँ पीव पतीजै नाहीं॥पीव मिलन को अहि निसि जागी।अजहूँ मेरी पलक न लागी॥जतन-जतन करि पंथ निहारों।पिव भावै त्यौं आप संवारों॥अब सुख दीजै जाउँ बलिहारी।कहै दादू सुणि बिपति हमारी॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+
बिषम दुहेला जीव कूँ, सतगुर थैं आसानदादू दयालकविताबिषम दुहेला जीव कूँ, सतगुर थैं आसानदादू दयाल२ मिनट का पाठ
तूँ सति तूँ अवगति तूँ अपरंपार, तूँ निराकार तुम्हंचा नामदादू दयालकवितातूँ सति तूँ अवगति तूँ अपरंपार, तूँ निराकार तुम्हंचा नामदादू दयाल२ मिनट का पाठ
रतन एक बहु पारिखू, सब मिलि करै बिचारदादू दयालकवितारतन एक बहु पारिखू, सब मिलि करै बिचारदादू दयाल२ मिनट का पाठ