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सो धन पिव जी साजि सँवारी

पद · लगभग २ मिनट
सो धन पिव जी साजि सँवारी।इब बेगि मिलौ तन जाइ बनवारी॥साजि सिंगार किया मन माहीं।अजहूँ पीव पतीजै नाहीं॥पीव मिलन को अहि निसि जागी।अजहूँ मेरी पलक न लागी॥जतन-जतन करि पंथ निहारों।पिव भावै त्यौं आप संवारों॥अब सुख दीजै जाउँ बलिहारी।कहै दादू सुणि बिपति हमारी॥

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