अपनी गरज हो मिटी सावरे हम देखी तुमरी प्रीत॥ ध्रु०॥आपन जाय दुवारका छाय ऐसे बेहद भये हो नचिंत॥ ठोर०॥१॥ठार सलेव करित हो कुलभवर कीसि रीत॥२॥बीन दरसन कलना परत हे आपनी कीसि प्रीत।मीरां के प्रभु गिरिधर नागर प्रभुचरन न परचित॥३॥

अपनी गरज हो मिटी सावरे हम देखी तुमरी प्रीत
मीराबाईपद · लगभग २ मिनट