जन्म मरन का भ्रम गया गोविंद लिव लागी।जीवन सुन्नि समानिया नुरु साखी जागी॥कासी ते धुनी उपजै धुनि कांसी जाई॥त्रिकुटी संधि मैं पेखिया घटहू घट जागी॥ऐसी बुद्धि समाचरी घट माही तियागी॥आप आप जे जागिया तेज तेज समाना॥कहु कबीर अब जानिया गोविंद मन माना॥73॥

जन्म मरन का भ्रम गया गोविंद लिव लागी
कबीरपद · लगभग २ मिनट