काहे कौ कीजै पाँडे छोति बिचारा।छोतिहीं तै उपना सब संसारा॥ टेक॥हमारे कैसे लोहू तुम्हारै कैसे दूध।तुम्ह कैसे बाँह्मण पाँडे हम कैसे सूद॥छोति छोति करता तुम्हहीं जाए।तौ ग्रभवास काहें कौं आए॥जनमत छोत मरत ही छोति।कहै कबीर हरि की बिमल जोति॥42॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+
हम घर सूत तनहि नित ताना कंठ जनेऊ तुमारेकबीरकविताहम घर सूत तनहि नित ताना कंठ जनेऊ तुमारेकबीर२ मिनट का पाठ
सासु की दुखी ससुर की प्यारी जेठ के नाम डरौं रेकबीरकवितासासु की दुखी ससुर की प्यारी जेठ के नाम डरौं रेकबीर२ मिनट का पाठ