इंडुरिया तू डारि दै हौ लंगर ढीठ कन्हाई।तेरौ कोऊ कहौ करेगौ! हमें घर खीजेगी माई॥कौन हवाल किये हरि? मेरे भली भांति मेरी दधि खाई।‘चतुर्भुजदास’ प्रभु गिरिधरन चाहि चित मेरो मन लियो चुराई॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+