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हाशिया
कविता
अकबर जतन अपार
दुरसा आढ़ा
सोरठा · लगभग २ मिनट
अकबर जतन अपार, रात दिवस रोकण करै।
पूगी समदा पार, पगी राण प्रतापसी॥
॥
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