राग कल्याण उद्धव मन अभिलाष बढ़ायो।जदुपति जोग जानि जिय साँचो नयन अकास चढ़ायो॥नारिन पै मोको पठवत हौ कहत लिखावन जोग।मनहीं मन अब करत प्रसंसा है मिथ्या सुख-भोग॥आयसु मानि लियो सिर ऊपर प्रभु-आज्ञा परमान।सूरदास प्रभु पठवत गोकुल मैं क्यों कहौं कि आन॥११॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+
हरि न मिले री माई! जन्म ऐसे ही लाग्यो जानसूरदासकविताहरि न मिले री माई! जन्म ऐसे ही लाग्यो जानसूरदास२ मिनट का पाठ