राग मलार
मधुकर रह्यो जोग लौं नातो।कतहिं बकत बेकाम काज बिनु, होय न ह्याँ तें हातो॥जब मिलि मिलि मधुपान कियो हो तब तू कहि धौं कहाँ तो।तू आयो निर्गुन उपदेसन सो नहिं हमैं सुहातो॥काँचे गुन लै तनु ज्यों बेधौ; लै बारिज को ताँतो।मेरे जान गह्यो चाहत हौ फेरि कै भैगल मातो॥यह लै देहु सूर के प्रभु को आयो जोग जहाँ तो।जब चहिहैं तब माँगि पठै हैं जो कोउ आवत-जातो॥८१॥

