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कबीर तुरी पलाँणियाँ, चाबक लीया हाथि

साखी · लगभग २ मिनट
कबीर तुरी पलाँणियाँ, चाबक लीया हाथि।दिवस थकाँ साँई मिलौं, पीछे पड़िहै राति॥१३॥

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