प्रानपियारो मिल्यो सपने में परी जब नेसुक नींद निहोरे।नाहक आइबो त्योंही जगाय कह्यो सखि बैन पियूष निचोरे॥यों ‘मतिराम’ बढ़यो जिय में सुख बाल के बालम सों दृग जोरे।ज्यो पट में अति ही चटकीलो चढ़े रंग तीसरी बार के बोरे॥

प्रानपियारो मिल्यो सपने में
मतिरामसवैया · लगभग २ मिनट