प्यारी-चरनन में नव-वसंत।दस नख ससि-किरननि नित लसंत।अरुनित अँगुरी है नव-प्रवाल।बिछुवा घुंघरू मुकुलित रसाल॥मेहँदीं-दुति केसू कौ प्रकास।जावक नव-वेली कर विलास।छिप बोलत स्यामल गनि सुरूप।कोकिल कुहवति है अति अनूप॥दामन-लामन मलया समीर।सुरभित चहुँदिसि मिलि हरत धीर।केसर उर की प्रिय लगी आय।गुनगुन गुनमंजरिं मधुप धाय॥

प्यारी-चरनन में नव-वसंत
गुणमंजरीदासपद · लगभग २ मिनट