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बेद कतेब कहहु मत झूठेइ झूठा जो न बिचारै

पद · लगभग २ मिनट
बेद कतेब कहहु मत झूठेइ झूठा जो न बिचारै।जो सब मैं एकु खुदा कहत हौ तौ क्यों मुरगी मारै॥मुल्ला कहहु नियाउ खुदाई तेरे मन का भरम न जाई।पकरि जीउ आन्या देह बिनती माटी कौ बिसमिल किया॥जोति सरूप अनाहत लागी कहु हलाला क्यों कीया॥क्या उज्जू पाक किया मुह धोया क्या मसीति सिर लाया।जौ दिले मैंहि कपट निवाजे छूजारहु क्या हज काबै जाया॥तू नापाक पाक नहीं सूक्ष्या तिसका मरम न जान्या॥191॥

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