ब्रज वारी गँवारी अनारी सबै यह चातुरता न लुगाइन में।बर बारिनि जानि अनारिनि सी गुन एकौ न चंदन नाइन में॥छवि रंग सुरंग के बुंद लसैं छवि इंद्र-वधू लघुताइन में।चित जो चहँदी ठगि सी रहँदी कहँ दी महँदी इन पाइन में॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+