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रहिमन जग जीवन बड़ो, काह न देखे नैन

दोहा · लगभग २ मिनट
रहिमन जग जीवन बड़ो, काह न देखे नैन।जाय दसानन अछत ही, कपि लागे गढ़ लैन॥२०५॥

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