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हाशिया
कविता
रहिमन जग जीवन बड़ो, काह न देखे नैन
रहीम
दोहा · लगभग २ मिनट
रहिमन जग जीवन बड़ो, काह न देखे नैन।
जाय दसानन अछत ही, कपि लागे गढ़ लैन॥२०५॥
॥
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रहिमन छोटे नरन सों, होत बड़ो नहिं काम
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रहिमन जा उर निसि परै, ता दिन डर सब कोय
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सोवत सब गुरु लोगवा, जानेउ बाल
रहीम
कविता
सोवत सब गुरु लोगवा, जानेउ बाल
रहीम
२ मिनट का पाठ
दीपक हिए छिपाइ, नवल बधू घर लै चली
रहीम
कविता
दीपक हिए छिपाइ, नवल बधू घर लै चली
रहीम
२ मिनट का पाठ
सीस नवाइ नबेलिया, निचवा जोइ
रहीम
कविता
सीस नवाइ नबेलिया, निचवा जोइ
रहीम
२ मिनट का पाठ