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हरिमुख निरखि निमेख बिसारे

पद · लगभग २ मिनट

राग गौरी

हरिमुख निरखि निमेख बिसारे।ता दिन तें मनो भए दिगंबर इन नैनन के तारे॥घूँघट-पट छांड़े बीथिन महँ अहनिसि अटत उघारे।सहज समाधि रूपरुचि इकटक टरत न टक तें टारे॥सूर, सुमति समुझति, जिय जानति, ऊधो! बचन तिहारे।करैं कहा ये कह्यो न मानत लोचन हठी हमारे॥९८॥

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