सौंह को सोचु सकोचु न पाँच को डोलत साह भए करि चोरी।बैननि बंचकताइ रची रति नैननि के साँग डोलत डोरी।लाज करै न डरै हित हानि तें आनि अरे जिय जानिके भोरी।नाहि नैं केसव साषु जिन्हैं बकि असेन सौं दुषबै मुष कोरी॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+
सासू और ननंद जम ऊ तें जोरदारगिरिधर पुरोहितकवितासासू और ननंद जम ऊ तें जोरदारगिरिधर पुरोहित२ मिनट का पाठ
प्रथम मिलाप कुंज-गेह में बिसाषा कियोगिरिधर पुरोहितकविताप्रथम मिलाप कुंज-गेह में बिसाषा कियोगिरिधर पुरोहित२ मिनट का पाठ
आई वे अचानक सौं, बेटी वृषभान ज्यू कीगिरिधर पुरोहितकविताआई वे अचानक सौं, बेटी वृषभान ज्यू कीगिरिधर पुरोहित२ मिनट का पाठ