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सौंह को सोचु सकोचु न पाँच को

सवैया · लगभग २ मिनट
सौंह को सोचु सकोचु न पाँच को डोलत साह भए करि चोरी।बैननि बंचकताइ रची रति नैननि के साँग डोलत डोरी।लाज करै न डरै हित हानि तें आनि अरे जिय जानिके भोरी।नाहि नैं केसव साषु जिन्हैं बकि असेन सौं दुषबै मुष कोरी॥

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