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कबीर पढ़िवा दूरि करि, आथि पढ़्या संसार

साखी · लगभग २ मिनट
कबीर पढ़िवा दूरि करि, आथि पढ़्या संसार।पीड़ न उपजी प्रीति सूॅ, तौ क्यूं करि करै पुकार॥३॥

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