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हाशिया
कविता
दुष्ट न छांड़ै दुष्टता पोखै राखै ओट
वृंद
दोहा · लगभग २ मिनट
दुष्ट न छांड़ै दुष्टता पोखै राखै ओट।
सरपहि केतौ हित करौ चुपै चलावै चोट॥
॥
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वृंद
कविता
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वृंद
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वृंद
कविता
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वृंद
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