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ऊधो जू! मैं तिहारे चरनन लागौं बारक या ब्रज करबि भाँवरी

पद · लगभग २ मिनट

राग बिहागरो

ऊधो जू! मैं तिहारे चरनन लागौं बारक या ब्रज करबि भाँवरी।निसि न नींद आवै, दिन न भोजन भावै, मग जोवत भई दृष्टि झाँवरी॥बहै बृंदावन स्याम सघन बन, बहै सुभग सरि साँवरी।एक स्याम बिनु स्याम न भावै सुधि न रही जैसे बकत बावरी॥लाज छाँड़ि हम उतहिं आवती चलि न सकति आवै बिरह-ताँवरी।सूरदास प्रभु बेगि दरस दीजै होय है जग में कीरति रावरी॥३६९॥

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