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खसम मरे तौ नारी न रोवै

पद · लगभग २ मिनट
खसम मरे तौ नारी न रोवै। उस रखवारा औरो होवै॥रखवारे का होइ बिनास। आगे नरक इहा भोग बिलास॥एक सुहागिन जगत पियारी। सगले जीव जंत की नारी॥सोहागिन गल सोहै हार। संत कौ विष बिगसै संसार॥करि सिंगार बहै पखियारी। संत की ठिठकी फिरै बिचारी॥संत भागि ओह पाछै परै। गुरु परसादी मारहु डरै॥साकत को ओह पिंड पराइणि। हमसो दृष्टि परै त्राखि डाइणि॥हम तिसका बहु जान्या भेव। जबहु कृपाल मिले गुरु देव॥कहु कबीर अब बाहर परी। संसारै कै अंचल लरी॥54॥

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